Thursday, April 1, 2010

सीटी-संकेत

'सीटी' की  भाषा  से हम, सबको  अवगत करवाते हैं,
चार दशमलव पांच शून्य, नियमों का ज्ञान कराते हैं|
 
'छोटी - सीटी  एक' बजे, तो  गाडी चलने  वाली  है,
अगले पिछले  इंजिन के, चालक  की जम्मेदारी है|
 
अगर गार्ड या स्टेशन, सिग्नल एक्सचेंज नहीं करता,
 'दो छोटी - सीटी' की भाषा, में यह  बात बतानी है|
 
'लम्बी - छोटी' गार्ड ब्रेक से मुक्त करो  अपनी गाडी,
स्टेशन  या  बीच  खंड  से, गाडी  चलने  वाली है|
 
'तीन बजे छोटी सीटी', तो गार्ड तुम्हें  बतलाती है,
ब्रेक  लगाओ  पीछे से, नहीं  गाडी  रुकने वाली है|
 
दुर्घटना-अवरोध-खराबी, गाडी नहीं हो चलने वाली,
'चार' बजाकर छोटी  सीटी, प्रोटेक्शन  करवाना है|
 
'लम्बी-लम्बी-छोटी-छोटी', सीटी अगर सुनाई देती,
गार्ड तुरत  तैयारी कर, इंजिन पर  तुमको जाना है|
 
टोकन नहीं मिला है या फिर, प्राधिकार प्रस्थान गलत है,
'छोटी - लम्बी - छोटी'  सीटी, यह  सन्देश  बताती  है|
 
तीन बजे लम्बी सीटी, जब आई बी एस खराब हुआ हो,
स्वचल रोक सिग्नल को भी, जब पार करो यह आती है|
 
कोहरा-गेट-टनल-स्टेशन, 'लगातार लम्बी सीटी' सुन,
प्रोटेक्शन  को गए  व्यक्ति को, भी वापस  आ जाना है|
 
'लम्बी-छोटी-लम्बी-छोटी', गाडी टूट  गयी है  समझो,
रेल - खंड  पर  खंडित  गाडी,  का  सन्देश  सुनती  है|
 
खतरे  की ज़ंजीर  खिंचे, या प्रैसर  काम हो जाए कभी,
'छोटी - छोटी - लम्बी' सीटी, से  सबको  बतलाना  है|
 
सिग्नल अगर खराब मिला, तब सबको यह बतलाना है,
'लम्बी - छोटी - छोटी सीटी', का  संकेत  सुनाना  है|
 
उल्लंघन  है  पार  'तीन लम्बी सीटी'  यह  कहती  है,
'बारबार छोटी सीटी'  खतरे  का  भान  कराती  है|

        "संरक्षा दर्शन के अंक-३२ में प्रकाशित"

Thursday, February 11, 2010

निश्चय

निश्चय एक करो बस मन में,
संरक्षा को नहीं भूलना|
कितनी भी हो अगर शीघ्रता,
इस निश्चय को नहीं तोड़ना||
सेवा के कुछ नियम उन्हें तुम,
'आदेशों का डर' न समझना|
सेवा के कर्मों में सुख है,
खुश होकर निष्पादन करना||
जीवन-म्रत्यु सेतु संरक्षा,
इसका मतलव सदा समझना|
दिल से इसका पालन करके,
हर मकसद में पार उतरना||
गलती तो सबसे होती है,
पर-उपहास कभी नहीं करना|
संरक्षा में कोर-कसर के,
पात्र कभी पर तुम मत बनना||
मैं कुछ कहूँ उसे मत सुनना,
वो कुछ कहें कभी मत करना|
बुद्धिजीव हो अपना निश्चय,

लेकिन याद सदा तुम रखना||
"संरक्षा दर्शन अंक-30 में प्रकाशित"

Friday, February 5, 2010

संरक्षा-संकल्प

दुर्घटना रुक जायेंगी, करो एक ही काम,
संरक्षा पालन सदा, प्रथम मंत्र लो जान|
नियमों का रखना सदा, अपने मन में ज्ञान,
पालन करना हर घडी, सदा होय गुणगान||
कोहरे में जब द्रष्यता, धूमिल पड़े लखाय,
गति नियंत्रित कीजिये, सिग्नल टेक लगाय|
पैदल की रफ़्तार से, गाढ़ी चलती जाय,
दुर्घटना से देर भली, सबकी जान बचाय||
नींद-नशा तो शत्रु हैं, सदा बंटाते ध्यान,
ज्ञान-तंत्र ढीला करें, होय सबल अज्ञान|
मालिक ने जब दे दिया, भले-बुरे का ज्ञान,
फिर क्यों सब-कुछ जानकर, बनते हो अज्ञान||
दुर्घटना हर पल रहे, बैठी घात लगाय,
तनिक नहीं करती रहम, सब-कुछ देत मिटाय|
संरक्षा की जस घडी, अनदेखी हो जाय,
वही एक पल, ज़िन्दगी देता दुखी बनाय||
संरक्षा के मंत्र यदि, सदा रखोगे याद,
कभी नहीं होगी हँसी, ना होगा अवसाद|
जन-जीवन के चमन की, फ़िज़ां न हो बर्बाद,
सुखमय जीवन का सदा, मिलता रहे प्रसाद||
संरक्षा की राह में, ज्ञान न होता अल्प,
दुर्घटना पर विजय का, दूजा नहीं विकल्प|
सोच-सोच कर सोच में, गुज़र न जाये कल्प,
आओ सब मिलकर करें, संरक्षा-संकल्प||


"संरक्षा दर्शन के अंक-31 में प्रकाशित"

Saturday, January 30, 2010

दिल में रखना हर-दम

संरक्षा को समझ प्रेमिका, दिल में रखना हर-दम|
नहीं पडेगा पछताना, सब सुखी रहेंगे हर - दम||
कर  पूरा  विश्राम,  काम  पर जाना  याद रखोगे,
ड्यूटी पर रहकर घर की सब, याद सखा विसरोगे|
संरक्षा  तेरे  दिल  में  फिर, साथ  रहेगी हर-दम||
नहीं पड़ेगा पछताना.........................................||
कर्म सिर्फ है धर्म, कभी तुम भार इसे न समझना,
नियमों के अनुसार काम को, तन्मयता से करना|
संरक्षा तन-मन को तेरे, स्वस्थ रखेगी हर-दम||
नहीं पडेगा पछताना.........................................||
सदा काम  में लापरवाही, सिर्फ  हानि  करती है,
चौकन्ने और सज़ग व्यक्ति से, दुर्घटना डरती है|
लगा रहे दिल संरक्षा से, मुदित ह्रदय हो हर-दम||
नहीं पड़ेगा पछताना.........................................||
कैसे   भी   संरक्षा   से,  सदा   मोहब्बत   करना,
काट-छाँट  के कामों से, मेरे यार  हमेशा  डरना|
जल्दी का फल कभी नहीं, मीठा होता सुन रे मन||
नहीं पड़ेगा पछताना.........................................||

"संरक्षा दर्शन के अंक-20 में प्रकाशित"