Tuesday, April 8, 2014

"सफल काम का मंत्र"


                 
सिग्नल कैसा पहले देखें, फिर गाड़ी प्रस्थान हो,
ऐ डब्लू ऐस है जीवन रक्षक, इसका नहीं अपमान हो।

सिग्नल ठीक मिला फिर भी, सब काँटों की पहचान हो,
आस-पास क्या काम हो रहा, पूर्ण रूप अनुमान हो।

कहाँ गति कितनी से चलना, इसका समुचित ज्ञान हो,
स्टेशन पर गाड़ी रुकने, में न कोई व्यवधान हो।

चले कहाँ से कहाँ है जाना, मंज़िल पर ही ध्यान हो,
हंसी ख़ुशी से काम को करना, ऐसी सोच महान हो।

संरक्षा पालन की महिमा, का पूरा गुणगान हो,
दुर्घटना तो पाप सदा, इस से न कभी पहचान हो।

नशा-व्यसन हैं घातक इनका, नहीं कोई नाम निशान हो,
निर्भय-निडर समय-पालन और, कर्म-परायण शान हो।

निंदक - दुर्ज़न - उद्दंडों के, डर से दिल अनज़ान हो,
संरक्षा ही सफल काम का, मंत्र सदा यह जान लो।

Monday, February 17, 2014

संरक्षा से रख पहचान

  
पल पल रहना सजग सखा,
और संरक्षा का कर सम्मान।  
कोई नहीं है बड़ा यहाँ पर,
नहीं किसी को छोटा जान ।।
 प्रेम भाव से चलती दुनिया,
रखना अटल मंत्र का ज्ञान।
 रेल देश का ह्रदय समझ,
हम  इसकी धड़कन पर कुर्बान।।
यात्री - ग्राहक मित्र हमारे,
सेवा से उनकी मुस्कान
 बिना स्वार्थ हो मदद सभी की,
तभी बनेगी रेल महान।।
 दुर्घटना होती विध्वंसक,
निर्दोषों की जाती जान। 
संरक्षा है कवच अभेदी,
कहीं न बन जाना अनजान।।
सुन्दर सुखद सफल जीवन ही,
सबके दिल का है अरमान। 
कर्म क्षेत्र की खुशहाली को,
मूल सूत्र दिल से लो जान।।
 काम मिला है जो भी उसको,
ज़िम्मेदारी लेना मान।  
कोई करे ना-करे प्रसंशा,
इसपर मत देना तुम ध्यान।।
कार्य कुशलता खुद करती है,
अपने कर्मों का गुणगान।  
सूरज को दीपक की लौ से,
कभी नहीं पड़ता है काम।।
 बुद्धि विवेक मिला विधना से,
मात पिता गुरुओं से ज्ञान।
 क्या - कब - क्यों - कैसे करना,
अब यह होगी तेरी पहचान।।
जीवन है शतरंज यहाँ,
और कर्म कसौटी पर है जान।  
खरा उतरना होगा इसपर,
संरक्षा से रख पहचान।।

Wednesday, March 6, 2013

सिग्नल

रूप अनेकों हैं जिसके सिग्नल कहलाता है,
कदम कदम का साथी हमको राह बताता है।
सर्दी-गर्मी - धूप-ताप उसको न सताता है,
काम करे अविराम कभी आलस नहीं लाता है।।

 

बहु-संकेती सिग्नल में बहु-रंग दिखाता है,
लाल - हरा - पीला होकर यह राह बताता है।
चालक का है सखा कभी कोई द्वेष न रखता है,
हर खतरे से हर-पल सबकी जान बचाता है।।

 

लाल कहे रुक जाने को खतरे का द्योतक है,
पीला कहता चलो मगर रुकने की नौवत है।
हरा रंग खुशहाली का बस चलते जाना है,
पालन यदि करते इनका निष्कंटक जीवन है।।

 

राह करे आसान रंगों से सब कह जाता है,
यातायात अधिकता को भी सरल बनाता है।
समझदार को अवरोधों का ज्ञान कराता है
,
चुप रहकर सब कुछ कहने का हुनर सिखाता है।।

 

अगर कभी सिग्नल बिगड़े तो नियम ये कहता है,
मत करना प्रस्थान मित्र इसमें भी धोखा है।
असमंजस हो अगर सुनिश्चित बार-बार करना है,
दुर्घटना से देर भली कोई फर्क न पड़ता है।।

Sunday, January 13, 2013

संरक्षा-दोहे

संरक्षा ह़ी सार है जीवन का सुन लेऊ।
सब कछु पीछे छोड़कर ध्यान इसी पर देऊ।। 

दुर्घटना से अब तलक खूब हुआ नुकसान।
अब इस पर अंकुश लगे सुन लो सकल सुजान।।
 

अब तक जो भी हो गया उसपर मत पछताव।
और न कछु ऐसो घटे  बहुरि परै पछताव।।
 

रण में जो आगे लड़े सो जोधा कहलाय।
जिनको मौका मिल गयौ नाम देऊ लिखवाय।।
 


तन मन धन और अकाल कौ खूब करे नुकसान।
मधुशाला के फेर में मत पड़ रे इंसान।।
 


रेल चलाने का मिला ज़ग में तुमको काम।
उसको ऐसो कीजिये होय खूब गुणगान।।
 

गलत न हो निर्णय कहीं मन में लेऊ विचार।
मानवता पर भूल से, कहीं न हो जाये प्रहार।।
 


ऐसे कितने सूरमा करनी रही विशेष।
लापरवाही से चढ़े दुर्घटना की भेंट।।
 


ऐसौ मत करियो करम माथे लगे कलंक।
करनी ऐसी चीज़ है राजा करदे रंक।।