Thursday, August 18, 2016

आओ मिलकर रेल चलाऐं,

आओ मिलकर रेल चलाऐं,
दिल में यह संकल्प जगाऐं। 
हंसी ख़ुशी से जीवन पथ पर,
संरक्षा को अमल में लाऐं।।
काम हमारा जैसा भी हो,
धर्म समझकर उसे निभाऐं। 
रेल चले तो देश बढ़ेगा,
इस विचार को सबल बनाऐं।।
संयम की राहों पर चलकर,
लापरवाही दूर भगाऐं।
नियमों का अनुपालन करके,
संचालन को सफल बनाऐं।।
नशा-नींद से दूर रहें सब,
जीवन चंचल चपल बनाऐं।
दुर्घटना की घोर निराशा,
तत्परता से अंत कराऐं।।
स्वस्थ विचारों के हों अंकुर,
मलिन ख़याल कभी ना लाऐं।।
जीवन है क्षण-भंगुर मित्रो,
सफल सुनिश्चित इसे कराऐं।।
मन उपजे संताप कभी,
उस कारण का हर अक्स मिटाऐं।
हों अ'शोक सब जन-गण-मन,
ऐसी आशा के दीप जलाऐं।।

Friday, November 13, 2015

शंटिंग



इंजन-कोच-माल डिब्बों को
गाड़ी से कभी जोड़ो तोड़ो।
एक लाइन से अगर दूसरी
लाइन पर प्रस्थान करो।।1।।
शंटिंग करते समय हृदय में
बस इतनी सी बात रखो।
अधिकृत नियम और निर्देशों
का क्रम से अनुसरण करो।।2।।
शंटिंग के जो नियम बने
उनका न कभी उल्लंघन हो।
अगर प्रकट  दुविधा मन में
कभी नहीं प्रस्थान करो।।3।।
असमंजस से बचो हमेशा
अन-होनी से दूर रहो।
पाँच दशमलव तेरह चौदह
नियमों का अध्ययन करो।।4।।
मुख्य लाइन पर जाकर जब भी
शंटिंग का निष्पादन हो।
पाठ आठ नियमो की पुस्तक
का मन में आधार करो।।5।।
हे ! "संरक्षा वीर" हृदय में
ऐसा तुम संकल्प करो
दुर्घटना हो दूर रेल से
खुशियों का विस्तार करो।।6।।

Sunday, September 13, 2015

संरक्षा

संरक्षा है अटल शस्त्र जो कभी न धोखा देती।
यदि इसका सम्मान करो खुशियाँ जीवन में भरती।।
संरक्षा का रखो ध्यान यदि चाहो आप सफलता,
सच्चे मन से अपना लो कोई नहीं रहेगी शंका।
दुर्घटना से अभय दान संरक्षा सबको देती।
यदि इसका सम्मान करो...................।।
नियमों का सम्मान करोगे अगर मित्र जीवन में,
कभी न मन हो मलिन हमेशा ख़ुशी मिले कर्मों में।
दुर्घटना से रहित सफर संरक्षा सफल बनाती।
यदि इसका सम्मान करो...................।।
मन में हो संकल्प रेल दुर्घटना शून्य करेंगे,
नियमों से हम विमुख कभी जीवन में नहीं रहेंगे।
पग - पग पर जीवन की धारा संरक्षा से चलती।।
यदि इसका सम्मान करो...................।।

Monday, November 17, 2014

रेल का हो सफर…….



रेल का हो सफर खुशियों से भरा।
उसकी खातिर करो कुछ यतन साथियो।
सिर्फ खुशियाँ मिलें ज़िन्दगी में सदा।
गम का नामो-निशाँ तक मिटे साथियो।
रेल है देश की धड़कनों की तरह। 
इसके चलने से चलता वतन साथियो।  
बिन रुके अनवरत पथ में बढ़ते रहो। 
देश सेवा से थकता ना तन साथियो।
रेल की राह में धर्म जाती नहीं।
ये कराती सभी का मिलन साथियो।
हिन्दू मुस्लिम हो सिख या ईसाई कोई।
सबका स्वागत करो ऐक सा साथियो।
हादसों से डरो सुख के दुश्मन हैं वो। 
रूह भी काँप उठती है सुन साथियो।  
रखना नियमों से तुम दोस्ती हर कदम। 
राह आसान होगी सहज साथियो।
कौन क्या कर रहा किसको क्या मिल गया।
मन मलिन अपना करना नहीं साथियो।
काम जो भी मिला किस्मत से तुम्हें।
उसको खुश होके करने में सुख साथियो।
सबका आदर करो नेक नीयत रखो। 
अपना ईमान दूषित ना हो साथियो।  
स्वार्थ सेवा में होना नहीं चाहिए। 
होगा उत्कृष्ट जीवन उदय साथियो।