Saturday, October 9, 2010

रेल-ग्रंथ

दुर्घटना से रहित रेल, चलने का सबक सिखाती है,
जी एंड एस आर नहीं सिर्फ, वह रेल ग्रंथ कहलाती है|
स्टेशन और रेल, रेल से परिचित हमें कराती है||
पहला ही अध्याय, रेल की परिभाषा सिखलाती है,
नियमों का रख ज्ञान, हानि कैसे रोकें बतलाती है|
रेल कर्मचारी हो कैसा, दर्शन हमें कराती है||
सिग्नल और उपस्कर उसके, ज्ञान हमें दे जाती है,
गाड़ी कैसे चले, समय और गति प्रतिबन्ध बताती है|
चालक दल का साज़ और कर्त्तव्य बोध करवाती है||
स्टेशन का सफल-नियंत्रण, कार्य-चलन समझाती है,
शंटिंग कैसे करें, पाठ पंचम में बोध कराती है|
दुर्घटना से विषम कार्य में, कैसे बचें सिखाती है||
आग लगे गाड़ी टूटे, पर नहीं डरो तुम कहती है,
 संचालन की पद्यतियां, अध्याय सात में मिलती हैं|
सिग्नल, गाड़ी-संचालन के, नियमों को कह देती है||
पूर्ण-ब्लाक में क्या कैसे हो, अष्टम बोध कराती है,
स्टेशन की श्रेणी के, अनुसार हमें समझाती है|
नवं स्वचल का ज्ञान करा, कर्तव्यों को बतलाती है||
सिंगल और डबल लाइन पर, निर्भय दौड़ो कहती है,
अनुगामी और पायलट-गार्ड, दस-ग्यारह में आती है|
ट्रेन स्टाफ और टिकट पद्यति, बारह में कह जाती है||
केवल एक चले गाड़ी, तेरह अध्याय बताती है,
चौदह में ब्लाक प्रचालन कर, पंद्रह में रेल बिछाती है|
सोलह में सम-पार बने, फाटक-वाला से कहती है||
विद्युत् वाले खंड के नियम, सत्रह में बतलाती है,
अठ्ठारहवां अध्याय सुनो, क्या बचा गया क्या कहती है|
यह रेल की गीता इसीलिए, बस रेल-ग्रंथ बन जाती है||

    "संरक्षा दर्शन के अंक-28 में प्रकाशित"

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